कमोबेश सभी को ब्लौगीयाते देख हम इस परेशानी मे रहे कि हम क्यों नहीं ब्लौग बना पा रहे हैं। कईयों को कहा कि भाई हमारा ब्लौग बनाने में हमारी मदद करो। लेकिन कोई सुन ही न रहा था। आखिरकार एक ने सूना और हम भी ब्लौग पर आ ही गए। इस बीच सचिन को देखते थे कि लगातार अपने ब्लौग को 'रिच-ऋचा' रहा था, ऐसे में भला हमारी मति पर प्रभाव पड़ना ही था कि हम क्योंकर पीछे रहें। अब जबकि हमारा भी ब्लौग बन ही गया है हम भी कचरा लेखन में सब से टक्कर ले सकेंगे।
तो बहनो और भाईयों, होशियार हो जाओ! हम आ रहे हैं तुम्हारे कंप्यूटर के की-बोर्ड तक, ताकी तुम्हे हिसाब बराबर करने का अफ़सोस न रहे। जितना कमेंट हमने तुम्हारे ब्लौग पर किया है, यदि उतना ही पूरा न हुआ तो समझना कुट्टी, हाँ!
सोमवार, 18 जून 2007
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